September 6, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

वकील बदलकर बार-बार याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग: हाईकोर्ट ने रिव्यू पिटीशन खारिज कर लगाया जुर्माना

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि बिना किसी ठोस और स्पष्ट त्रुटि के बार-बार रिव्यू पिटीशन दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत ने कहा कि जब किसी मामले में सभी तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय दिया जा चुका हो, तो केवल दोबारा सुनवाई के उद्देश्य से रिव्यू याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।

मामले में याचिकाकर्ता ने पहले सिंगल बेंच, फिर डिवीजन बेंच और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक याचिका दायर की, लेकिन हर स्तर पर उसे राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट से विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज होने के बाद भी याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की, जिसे अदालत ने सख्त टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रिव्यू पिटीशन को अपील का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट के अनुसार, अलग-अलग चरणों में अलग वकीलों को नियुक्त कर बार-बार याचिकाएं दायर करना न्यायिक अनुशासन के खिलाफ है। इसी कारण अदालत ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और इसे सरकारी विशेषीकृत एजेंसी को देने का आदेश दिया।

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