छत्तीसगढ़ के सहायक शिक्षकों में हाल ही में प्रस्तुत राज्य बजट को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। सहायक शिक्षक फेडरेशन ने बजट को निराशाजनक बताते हुए शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया। संगठन का कहना है कि “मोदी की गारंटी” के तहत किए गए वादों को शीघ्र पूरा किया जाए, विशेषकर वेतन विसंगति, क्रमोन्नति और पूर्ण पेंशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लिया जाए।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से वेतन असमानता की समस्या बनी हुई है, जिससे शिक्षकों का मनोबल और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि चुनावी घोषणा पत्र में 100 दिनों के भीतर वेतन विसंगति दूर करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन हालिया बजट में इस संबंध में कोई स्पष्ट वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया। इससे शिक्षकों के बीच असंतोष और बढ़ गया है।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे केवल वेतन सुधार ही नहीं, बल्कि क्रमोन्नति की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने तथा पूर्ण पेंशन की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को सम्मानजनक भविष्य सुरक्षा मिलनी चाहिए।
हालांकि, फेडरेशन ने राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई कैशलेस चिकित्सा सुविधा की पहल का स्वागत करते हुए उसके लिए आभार भी व्यक्त किया। उनका कहना है कि यह कदम कर्मचारियों के हित में है, लेकिन अन्य लंबित मांगों पर भी समान गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
इस मुद्दे को लेकर फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल विधानसभा पहुंचा और शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधियों ने सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है। अब सभी की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह शिक्षकों की मांगों पर कब और किस प्रकार ठोस कदम उठाती है।
