गरियाबंद जिले में इस बार सुशासन तिहार का आयोजन किया गया है, लेकिन वैश्विक नेटवर्क ने इसकी घोषणा नहीं की है, बल्कि 8 बच्चों की वो मांग है, जिसे छात्र तक शामिल कर लिया गया है।
असली, मैनपुर ब्लॉक के इन प्लास्टर ने जनसमस्या समाधान शिविर में बा एक सामूहिक आवेदन देने वाले सरकार से चनैन खींच लिया- “हमारी शादी करवा दे सरकार, अब अकेले नहीं जिया जाता।” आवेदन पहले तो अधिकारी पद पर थे, लेकिन जब उन्होंने चारो तरफ की बातें लिखीं, तो राक्षस गंभीर हो गए।
आवेदन में क्या लिखा था?
आवेदन में लिखा गया- हमें सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक आधार पर अब तक शादी नहीं मिली। कोई अनाथ है, किसी ने किसी को ठुकरा दिया है। अब उम्र बढ़ रही है, अकेलापन खा रहा है। सरकार अगर विधवा, तलाकशुदा या बेसहारा महिलाओं से भी शादी में मदद करे, तो हम तैयार हैं।
जनसुनवाई में पहली बार मिली ऐसी अपील
एसडीएम से लेकर पंचायत अधिकारी तक सभी ने इसे पहली बार देखा। रिलांयस ने वादा किया था कि इस आवेदन को उच्चस्तरीय न्याय अधिकारियों तक की अनुमति और सामाजिक विभाग से चर्चा की जाएगी कि क्या ऐसी योजना संभव है।
गांव में चर्चा बना का विषय
अब यह फाइल गांव में ही नहीं, पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ लोग इसे मजाक में ले रहे हैं, तो कुछ इसे गंभीर सामाजिक समस्या मान रहे हैं।
जिनके पास न नौकरी है, न ज़मीन— उनके पास अकेलेपन ही है
इन टुकड़ों में से कुछ दिहाड़ी मजदूर हैं, तो कुछ खेती-बबड़ी से भी दूर हैं। कहते हैं—जब किसी का कुछ नहीं होता, तो शादी जैसी साधारण बात भी सपना लगती है। हम सिर्फ प्रेमी नहीं, एक सहारा मांग रहे हैं।
