रायगढ़ जिले में मरीन ड्राइव निर्माण परियोजना को लेकर प्रशासन और स्थानीय निवासियों के बीच गंभीर टकराव सामने आया है। विकास कार्य के नाम पर की जा रही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने इंसानी पीड़ा और प्रशासनिक रवैये को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला दिया है।
प्रशासन ने बीते गुरुवार रात को अचानक 15 घरों को खाली करने का नोटिस जारी किया और शुक्रवार सुबह अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों, विशेष रूप से महिलाओं में भारी आक्रोश फैल गया। कई महिलाओं ने मौके पर धरना दिया और पुलिस से बहस और झड़प भी हुई। कुछ जगहों पर धक्का-मुक्की और रोषपूर्ण प्रदर्शन हुआ।
एक महिला ने मीडिया से बातचीत में कहा, “रात को हमें नोटिस देकर कहा गया कि घर खाली करो। सुबह तक सब तोड़ दिया गया। अब न खाना है, न पानी, न बच्चों के लिए कोई छांव।”
प्रशासन का तर्क है कि यह कार्रवाई पूर्व में दी गई नोटिस के आधार पर की गई है और सभी निर्माण अवैध थे। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें न समय दिया गया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था बताई गई।
इस घटनाक्रम ने विकास बनाम मानवीयता की बहस को जन्म दिया है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और नेताओं ने प्रशासन से मांग की है कि जिनके घर तोड़े गए हैं, उन्हें तुरंत राहत और पुनर्वास की व्यवस्था दी जाए। साथ ही महिलाओं के साथ हुई कथित बदसलूकी की निष्पक्ष जांच भी हो।
