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October 23, 2026
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“नौकरी मांगी पर मिली नसीहत: सुप्रीम कोर्ट ने अमीर वारिस को अनुकंपा नियुक्ति से किया बाहर”

भारत में अनुकंपा नियुक्ति एक सहानुभूति पर आधारित सरकारी नीति है, जिसका उद्देश्य मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को आर्थिक तंगी से उबारना होता है। लेकिन समय के साथ इसके दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसी संदर्भ में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जो इस नीति की व्याख्या और सीमाओं को स्पष्ट करता है।

मामले की पृष्ठभूमि:

यह मामला एक ऐसे युवक से जुड़ा है, जिसके पिता एक सरकारी कमिश्नर थे। पिता के निधन के बाद उसने अनुकंपा नियुक्ति के तहत नौकरी की मांग की। लेकिन न्यायालय को यह पता चला कि याचिकाकर्ता के पास एक से अधिक मकान और कई एकड़ ज़मीन है। आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद वह सरकारी नौकरी की मांग कर रहा था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला:

सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए दो टूक कहा कि अनुकंपा नियुक्ति “अधिकार” नहीं है, बल्कि एक “अपवाद” है – जो केवल उन लोगों के लिए है, जो मृतक कर्मचारी पर आश्रित थे और उसकी मृत्यु के बाद कठिन आर्थिक परिस्थितियों में आ गए हैं। संपन्न लोगों को यह लाभ नहीं दिया जा सकता।

फैसले का व्यापक प्रभाव:

इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि अब अनुकंपा नियुक्ति की मांग करने वालों को केवल पारिवारिक स्थिति नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति भी प्रमाणित करनी होगी। यह फैसला कई ऐसे मामलों पर रोक लगाएगा, जहां लोग इस व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करते हैं।

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