केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बस्तर दौरा अंतिम क्षणों में रद्द हो गया, जिससे छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। रविवार को शाह का माओवाद प्रभावित बस्तर क्षेत्र में जाने का कार्यक्रम तय था, जहां उन्हें सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी थी। लेकिन अचानक योजना बदली और वे रायपुर में ही रुक गए।
रायपुर में उन्होंने केंद्रीय बलों और पुलिस के जवानों से बातचीत की, उन्हें सम्मानित किया और उनके साथ लंच किया। शाह ने कहा कि केंद्र सरकार जवानों के हित में लगातार काम कर रही है और देश को माओवाद से मुक्त करने के लिए हर स्तर पर प्रयास तेज किए जा रहे हैं।
हालांकि, उनके बस्तर न जाने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र पर निशाना साधा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाते हुए कहा, “जब गृह मंत्री राज्य में हैं और फिर भी बस्तर नहीं जा रहे, तो इसका मतलब साफ है कि वे वहां की स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार की नीतियां जमीन पर कितनी सफल रही हैं, इस पर खुद गृह मंत्री को संदेह है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमित शाह का बस्तर दौरा रद्द होना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि यह संकेत भी हो सकता है कि केंद्र की नजर में अभी भी बस्तर एक चुनौती बना हुआ है। वहीं, भाजपा नेताओं ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि यह बदलाव केवल समयाभाव और रणनीतिक कारणों की वजह से किया गया।
