छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है, जिसमें कानून के रक्षक ही भक्षक बन गए। जशपुर जिले की दो नाबालिग बच्चियों को पढ़ाई का लालच देकर बिलासपुर लाया गया। बच्चियों को बताया गया कि उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाएगी, जिससे उनका भविष्य संवर सके। लेकिन असलियत में उन्हें पुलिसकर्मियों के क्वार्टर में नौकरानी बनाकर काम पर लगा दिया गया।
बच्चियों से झाड़ू-पोंछा, बर्तन और अन्य घरेलू काम जबरन कराए गए। काम करने से मना करने पर उन्हें डराया, धमकाया और मारा-पीटा गया। यह सब दो पुलिस कांस्टेबलों द्वारा किया गया, जो कि तोरवा थाना क्षेत्र से संबंधित हैं।
इस अमानवीय व्यवहार से परेशान होकर दोनों बच्चियाँ किसी तरह रविवार की रात वहां से भागने में सफल रहीं। अब उन्हें सरकारी सखी सेंटर में सुरक्षित रखा गया है, जहाँ उनकी काउंसलिंग की जा रही है।
यह घटना न केवल समाज को झकझोर देने वाली है, बल्कि पुलिस तंत्र की गंभीर खामियों को भी उजागर करती है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम जनता कैसे सुरक्षित महसूस कर सकती है? इस घटना की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और दोषी पुलिसकर्मियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि यह एक मिसाल बने और भविष्य में कोई और बच्ची इस तरह की पीड़ा न सहे।
