छत्तीसगढ़ में 5000 शिक्षकों की नई भर्ती की घोषणा के साथ ही प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। जहां भाजपा सरकार इसे शिक्षा सुधार का हिस्सा बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि स्कूलों के मर्जर से करीब 45 हजार शिक्षकों के पद खत्म हो सकते हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार एक तरफ नई भर्ती का ढिंढोरा पीट रही है, दूसरी ओर गांव-गांव के स्कूलों को “मर्जर” के नाम पर बंद कर रही है, जिससे हजारों पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
कांग्रेस का आरोप: ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई पर असर
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कम छात्रों वाले स्कूलों को पास के बड़े स्कूल में मर्ज किया जा रहा है
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सरकार का दावा: इससे शिक्षकों का बेहतर उपयोग होगा
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कांग्रेस का आरोप: इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल दूरी पर होंगे, जिससे ड्रॉपआउट बढ़ेगा
भाजपा का जवाब: ‘बंद’ नहीं, ये ‘समायोजन’ है
“स्कूलों का बंद होना गलत शब्द है। हम समायोजन कर रहे हैं, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए 5000 नई भर्तियां कर रहे हैं। ग्रामीण शिक्षा मजबूत की जा रही है, न कि कमजोर।”
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
शिक्षा नीति विश्लेषकों का मानना है कि”अगर मर्जर सोच-समझकर हुआ और बच्चों की सुविधा ध्यान में रखी गई, तो यह सकारात्मक कदम हो सकता है। लेकिन भौगोलिक दूरी, ट्रांसपोर्ट और संसाधनों का अभाव इसे विवादास्पद बना सकता है।”
