इंदौर, मध्यप्रदेश। इंदौर के MTH अस्पताल में शुरू हुआ राज्य का पहला मदर मिल्क बैंक अब रोल मॉडल बन चुका है।
यहां अब तक 1 हजार से ज्यादा नवजातों की जान बचाई जा चुकी है, माताओं ने 210 लीटर से अधिक दूध डोनेट किया है।
डोनर माताएं बनीं फरिश्ता
- हर दिन अस्पताल की माताएं स्वेच्छा से अपना दूध डोनेट कर रही हैं।
- दूध को पाश्चुरीकरण (Pasteurization) प्रक्रिया से स्टरलाइज कर सुरक्षित -30°C पर स्टोर किया जाता है।
- जन्म के बाद दूध नहीं पी पाने वाले या कम वज़न वाले शिशुओं को यही दूध दिया जाता है।
हर बूंद जीवनदायिनी बनी
अब तक 1 हजार से अधिक नवजातों को इससे लाभ मिला है।
प्रतिदिन करीब 10–15 नवजात को यह दूध दिया जा रहा है।
मिल्क बैंक से न सिर्फ इंदौर, बल्कि आसपास के जिलों — खंडवा, धार, उज्जैन तक के शिशु लाभान्वित हो रहे हैं।
मेडिकल टीम का मानना
“नवजात को मां का दूध न मिले तो उसकी इम्युनिटी कमजोर रहती है। मदर मिल्क बैंक से उन्हें पोषण भी मिलता है और संक्रमण से बचाव भी होता है।”
अगली योजना क्या है?
- जल्द ही यह मिल्क बैंक ओपीडी माताओं से भी दूध लेने की शुरुआत करेगा।
- जरूरत पड़ी तो राज्य के अन्य जिलों में भी इस मॉडल को दोहराया जाएगा
