छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से निकलकर देश की सैन्य ताकत का हिस्सा बनना कोई आसान काम नहीं, लेकिन देवेंद्र ने यह कर दिखाया। सीमित संसाधनों, साधारण परिवेश और बिना किसी खास मदद के, देवेंद्र अब भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट बन चुके हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक चयन की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और अनुशासन की मिसाल है।
देवेंद्र का सपना था कि वह देश की सेवा करें, और उन्होंने अपने इस सपने को साकार करने के लिए खुद को हर स्तर पर तैयार किया। सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अंग्रेजी बोलने की तैयारी किसी कोचिंग सेंटर में नहीं, बल्कि अपने कमरे में लगे आईने के सामने की। खुद से अफसरों की तरह खड़े होकर, बोलचाल की शैली को सुधारते हुए, उन्होंने आत्मविश्वास की नई मिसाल कायम की
NDA यानी नेशनल डिफेंस एकेडमी की ट्रेनिंग को देश की सबसे कठिन ट्रेनिंग में गिना जाता है। देवेंद्र ने बताया कि वहाँ शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर चुनौती दी जाती है। रोज सुबह 4 बजे उठकर दौड़, अनुशासन, क्लासेस और फिर कड़े फिजिकल ड्रिल — ये उनकी दिनचर्या बन गई थी। उन्होंने यह भी साझा किया कि कई बार शरीर थक जाता था, लेकिन मन कभी नहीं हारा।
उनकी इस सफलता में परिवार का भी बड़ा योगदान रहा। देवेंद्र के माता-पिता ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया, भले ही संसाधन सीमित थे। उनके इस सफर ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
आज देवेंद्र छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि भाषा, संसाधन या शहर की सीमाएँ आपके सपनों को नहीं रोक सकतीं — ज़रूरत है तो सिर्फ मेहनत, धैर्य और संकल्प की।
