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October 26, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

7 करोड़ का तेंदूपत्ता घोटाला: आदिवासियों का हक लूटा, DFO समेत 11 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में तेंदूपत्ता बोनस घोटाले ने आदिवासी संग्राहकों की मेहनत पर डAKA डाला। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 7 करोड़ रुपये के इस घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 4 वन विभाग कर्मचारियों और 7 प्राथमिक वनोपज समिति प्रबंधकों समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूर्व डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) अशोक कुमार पटेल भी पहले गिरफ्तार हो चुके हैं।

घोटाले का खुलासा: फर्जी हस्ताक्षर, बोनस का गबन

2021 और 2022 के तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन में लगभग 90,000 आदिवासी संग्राहकों को 4.51 करोड़ (2021) और 3.70 करोड़ (2022) रुपये का बोनस नकद में वितरित किया जाना था। अधिकांश संग्राहकों के पास बैंक खाते नहीं होने के कारण नकद भुगतान का प्रावधान था। लेकिन जांच में सामने आया कि DFO अशोक कुमार पटेल ने अन्य अधिकारियों और समिति प्रबंधकों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। फर्जी हस्ताक्षर, भुगतान आदेश और संग्राहक सूचियों के जरिए राशि का बड़ा हिस्सा हड़प लिया गया। कुछ राशि निजी व्यक्तियों और गैर-कानूनी गतिविधियों में डायवर्ट की गई।

पूर्व विधायक की शिकायत से शुरू हुई जांच

पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने 8 जनवरी 2025 को सुकमा कलेक्टर को पत्र लिखकर 3.62 करोड़ रुपये के गबन की शिकायत की थी। इसके बाद EOW ने जांच शुरू की, जिसमें फर्जी दस्तावेजों और मृत व्यक्तियों के नाम पर भुगतान जैसे तथ्य सामने आए। 10 अप्रैल 2025 को सुकमा, दोरनापाल और कोंटा में 12 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 26 लाख रुपये से अधिक नकदी बरामद हुई।

कोर्ट में पेश, 30 जून तक रिमांड

EOW ने 26 जून 2025 को सभी 11 आरोपियों को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया, जहां उन्हें 30 जून तक पुलिस रिमांड में भेजा गया। जांच एजेंसियां अब घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य संदिग्धों की तलाश में हैं।

आदिवासियों पर प्रभाव, उठे सवाल

तेंदूपत्ता, जिसे ‘हरित सोना’ कहा जाता है, सुकमा के आदिवासी समुदायों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। इस घोटाले ने न केवल उनकी मेहनत को नुकसान पहुंचाया, बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। जिला पंचायत सदस्य हुंगाराम मरकाम ने मांग की है कि बकाया बोनस की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।

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