छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक जिम्मेदारियों की अनदेखी और कानून के दुरुपयोग का एक मामला तब सामने आया, जब एक युवक ने नीली बत्ती लगी DSP की सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल अपने जन्मदिन के जश्न के लिए किया। वायरल हुए वीडियो में वह गाड़ी की बोनट पर बैठा दिख रहा है और बैकग्राउंड में तेज़ आवाज़ में म्यूज़िक बज रहा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की नजर में आ गया।
हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की गंभीरता को समझा और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र (affidavit) प्रस्तुत करें, जिसमें यह बताया जाए कि वीडियो में दिख रहे स्टंट और सरकारी वाहन के दुरुपयोग पर क्या कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं सरकारी व्यवस्था और जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ हैं। अदालत ने कहा कि नीली बत्ती किसी आम वाहन की नहीं, बल्कि कानून के प्रतिनिधि की पहचान होती है, और उसका इस तरह का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक और गैरकानूनी है।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि दिए गए उत्तर संतोषजनक नहीं पाए गए, तो वह स्वयं इस मामले की निगरानी करेगी और आवश्यक निर्देश जारी करेगी। इस टिप्पणी से साफ है कि हाईकोर्ट प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
यह घटना न केवल सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि प्रभावशाली पदों का इस्तेमाल कैसे नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। ऐसे में न्यायपालिका की सख्ती एक सकारात्मक संदेश है कि कानून सबके लिए बराबर है — चाहे वह आम नागरिक हो या कोई अधिकारी
