नवा रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज (SRIMSR) में मान्यता दिलाने के नाम पर किए गए करोड़ों के रिश्वत कांड का खुलासा होने के बाद देशभर में मेडिकल शिक्षा की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कार्रवाई करते हुए अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, इस मामले में नामजद 29 अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश CBI की टीमें कर रही हैं।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कॉलेज के निदेशक अतुल कुमार तिवारी, तीन नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के निरीक्षक डॉक्टर—डॉ. मंजप्पा सीएन, डॉ. चैत्रा एमएस और डॉ. अशोक शेलके, और दो बिचौलिये सतीश ए. और रविचंद्र के. शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने मेडिकल कॉलेज को मान्यता दिलवाने के लिए फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की और इसके बदले ₹55 लाख की रिश्वत दी और ली गई।
CBI ने छापेमारी में सतीश से ₹38.38 लाख और रविचंद्र से ₹16.62 लाख नकद बरामद किए। यह रकम हवाला नेटवर्क के जरिए पहुंचाई गई थी। इतना ही नहीं, छापेमारी के दौरान कई डिजिटल दस्तावेज, लैपटॉप, पेन ड्राइव और संदिग्ध फाइलें भी जब्त की गईं, जो इस मामले में सबूत के तौर पर पेश की जा सकती हैं।
CBI का दावा है कि इस घोटाले की जड़ें सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं हैं। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में भी छापेमारी की गई है। अब तक इस घोटाले से जुड़े करीब 40 से ज्यादा ठिकानों पर कार्रवाई हो चुकी है।
विशेष CBI अदालत ने सभी 6 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। CBI अब इनसे पूछताछ कर रही है ताकि इस घोटाले के पूरे नेटवर्क को उजागर किया जा सके।
यह मामला न सिर्फ मेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया में फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे निजी संस्थान नियमों को ताक पर रखकर धनबल से फर्जी मान्यताएं हासिल कर रहे हैं। इससे देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर गहरा आघात पहुंचा है।
