October 23, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

“फर्जी प्रमाणपत्रों पर नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्ती की मांग को लेकर दिव्यांगों ने विधानसभा का किया घेराव”

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक असाधारण सामाजिक चेतना का दृश्य सामने आया जब दिव्यांग संगठनों ने मिलकर विधानसभा का घेराव किया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग थी।

प्रदर्शन का कारण और पृष्ठभूमि:

दिव्यांग संगठनों का आरोप था कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से चुने गए 148 अधिकारियों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों का उपयोग कर आरक्षण का अनुचित लाभ उठाया और सरकारी पदों पर नियुक्ति प्राप्त की। इन पदों में डिप्टी कलेक्टर, लेखा अधिकारी, नायब तहसीलदार, सहकारिता निरीक्षक, पशु चिकित्सक जैसे प्रतिष्ठित पद शामिल हैं।

प्रदर्शन की प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई:

दिव्यांग संघ के लोग विधानसभा की ओर पैदल मार्च कर रहे थे, जब पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में भरकर नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर ले जाया गया। इस दौरान महिलाओं और पुरुषों के साथ बलपूर्वक व्यवहार किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और लोगों की संवेदनाएं जागीं।

संघर्ष का स्वरूप और दिव्यांगों की मांगें:

प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि यह आंदोलन सिर्फ उनके अधिकारों की रक्षा के लिए नहीं है, बल्कि एक नैतिक लड़ाई भी है—उन फर्जी लोगों के खिलाफ, जो दिव्यांग आरक्षण प्रणाली को बदनाम कर रहे हैं।

उनकी प्रमुख मांगें थीं:

1. फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जांच और दोषियों की बर्खास्तगी

2. असली दिव्यांगों को आरक्षण का उचित लाभ

3. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में सुधार

4. चिकित्सा एवं पुनर्वास सेवाओं की मजबूती

5. पेंशन में वृद्धि

 

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