उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में एक बड़ा और सराहनीय कदम तब देखने को मिला जब समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने अपने ही निजी सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। यह घटना न केवल प्रशासनिक जवाबदेही को दर्शाती है बल्कि महिलाओं की सुरक्षा के प्रति गंभीरता का भी प्रमाण है।
यह मामला तब सामने आया जब समाज कल्याण विभाग के मुख्यालय में तैनात एक महिला कर्मचारी ने मंत्री असीम अरुण से शिकायत की कि उनके निजी सचिव जय किशन सिंह ने उसके साथ अश्लील हरकत की है। महिला की इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंत्री असीम अरुण ने तुरंत पुलिस को फोन कर बुलाया और आरोपी निजी सचिव को गिरफ्तार करवाया।
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी कार्यालयों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एक अहम संदेश दिया है। मंत्री द्वारा की गई त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई यह दर्शाती है कि अब शासन में ऐसे मामलों को दबाने के बजाय न्याय देने की प्राथमिकता दी जा रही है।
यह कदम उन सभी महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है जो अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से डरती हैं। जब प्रशासनिक पदों पर बैठे लोग खुद कानून का पालन करते हैं और पीड़ितों की सुनवाई करते हैं, तो यह समाज में विश्वास को मजबूत करता है।
मंत्री असीम अरुण की यह कार्रवाई न केवल एक अपराधी को कानून के हवाले करने तक सीमित है, बल्कि यह एक बड़ा सामाजिक और नैतिक संदेश भी देती है कि किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं समझा जाएगा।
