छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर हुए हैं। इन्हीं मामलों में सबसे बड़ा घोटाला “स्कूल जतन योजना” से जुड़ा है। इस योजना के तहत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने स्कूलों के जीर्णोद्धार के नाम पर लगभग 1500 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया था, लेकिन अब इस पूरी योजना में भारी भ्रष्टाचार सामने आ रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश और जांच की स्थिति
मौजूदा सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के कलेक्टरों को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने का सख्त निर्देश दिया था। लेकिन आज 13 महीने गुजर जाने के बावजूद अधिकांश जिलों में कलेक्टर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं इस मामले की जांच में देरी और टालमटोल की जा रही है।
नई सरकार की चुनौती
राज्य के नए शिक्षा मंत्री के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वे इस 1500 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की जांच में बाधा डालने वालों के खिलाफ कड़ा एक्शन लें। सवाल यह है कि क्या सरकार सख्ती दिखाएगी या फिर यह मामला भी अफसरशाही और राजनीतिक दबाव की भेंट चढ़ जाएगा।
भ्रष्टाचार के पिछले मामले
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद कांग्रेस सरकार के दौरान हुए कई घोटाले उजागर हुए। कोयला, शराब और डीएमएफ (DMF) घोटाले में ईडी, सीबीआई और एसीबी जैसी एजेंसियों ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। कई आईएएस अधिकारियों और बड़े कारोबारियों को गिरफ्तार भी किया गया।
स्कूल जतन योजना का घोटाला
स्कूल जतन योजना के तहत सरकार का उद्देश्य था कि प्रदेश के स्कूलों को नई सूरत दी जाए, भवनों की मरम्मत हो और बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल मिले। लेकिन आरोप है कि इन कामों में बड़े पैमाने पर धांधली की गई। बिलों में हेरफेर, फर्जी टेंडर और कमीशनखोरी के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ।
