रायपुर। छत्तीसगढ़ में मेडिकल पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) एडमिशन प्रक्रिया लगातार अटकने से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नियमों में बार-बार किए गए बदलाव और कानूनी अड़चनों के कारण अब तक काउंसलिंग शुरू नहीं हो सकी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश में मेडिकल PG का पूरा शैक्षणिक सत्र ही ‘जीरो ईयर’ बन सकता है।
कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा मेडिकल PG प्रवेश नियमों में बार-बार संशोधन किए गए, जिससे प्रक्रिया अस्थिर हो गई। पहले लागू नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान जोड़े गए, जिन्हें लेकर छात्रों और संगठनों ने आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने पर यह मामला अदालत तक पहुंच गया, जिसके चलते काउंसलिंग पर रोक जैसी स्थिति बन गई।
मेडिकल PG एडमिशन से जुड़े नियमों को चुनौती देते हुए याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गईं। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। अदालतों में सुनवाई लंबित होने के कारण राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण अंतिम प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रहा है।
इस अनिश्चितता का सीधा असर हजारों मेडिकल छात्रों पर पड़ रहा है। NEET-PG परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थी महीनों से काउंसलिंग की तारीख का इंतजार कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि देरी के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है और यदि सत्र रद्द होता है तो उनका एक पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि मेडिकल PG सत्र प्रभावित होने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा। समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने से सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था कमजोर हो सकती है। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि वह तुरंत स्थिति स्पष्ट करे और अदालत में लंबित मामलों का शीघ्र समाधान निकालकर काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू करे।
वहीं, सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि कानूनी प्रक्रिया के दायरे में रहकर समाधान खोजा जा रहा है। हालांकि, जब तक अदालतों से अंतिम आदेश नहीं आता, तब तक मेडिकल PG एडमिशन को लेकर अनिश्चितता बनी रहने की आशंका जताई जा रही है।
