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October 22, 2026
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छत्तीसगढ़

नक्सलियों ने शांति वार्ता को दी हरी झंडी, अस्थायी संघर्ष विराम का ऐलान

17 सितंबर 2025 को बस्तर से एक ऐतिहासिक खबर सामने आई। नक्सल आंदोलन से प्रभावित इस क्षेत्र में पहली बार ऐसा हुआ है जब वामपंथी चरमपंथी संगठन सीपीआई (माओवादी) ने अस्थायी रूप से हथियार डालने और सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए आगे बढ़ने की घोषणा की। संगठन की केंद्रीय कमेटी द्वारा जारी यह प्रेस नोट, वरिष्ठ नक्सली नेता अभय के नाम से 15 अगस्त 2025 को जारी किया गया था, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया कि 2024 से चल रहे पुलिस-नक्सली अभियानों में दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में संगठन ने एक माह के संघर्ष विराम (सीजफायर) का निर्णय लिया है। इस दौरान सरकार के साथ सार्थक संवाद और समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

अभय ने अपने पत्र में यह भी कहा कि माओवादी संगठन अब जन समस्याओं के समाधान के लिए राजनीतिक दलों और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी का यह निर्णय केवल तभी सार्थक होगा जब सभी स्तरों पर सहमति बने और उसके बाद प्रतिनिधिमंडल बनाकर शांति वार्ता में भाग लिया जाए।

संगठन ने सरकार से मांग रखी है कि जेल में बंद अपने कैदियों और नेताओं से विचार-विमर्श की अनुमति दी जाए। इसके लिए वे वीडियो कॉल के माध्यम से भी प्रारंभिक बातचीत करने को तैयार हैं।

इस बीच छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि नक्सलियों के इस पत्र की सत्यता की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस पर अंतिम निर्णय केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राज्य के मुख्यमंत्री के साथ मिलकर लिया जाएगा।

इस घोषणा ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एक नई उम्मीद जगाई है। यदि यह पहल सफल होती है, तो वर्षों से हिंसा और असुरक्षा झेल रहे आदिवासी और स्थानीय लोग शांति और विकास की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।

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