नान घोटाले में फंसे आलोक शुक्ला ने रायपुर की ईडी स्पेशल कोर्ट में सरेंडर करने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका ठुकरा दी। कोर्ट का साफ कहना था कि बिना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सरेंडर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस फैसले के बाद आलोक शुक्ला समेत अन्य आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से 10 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। अदालत का रुख यह दिखाता है कि इस घोटाले में किसी भी आरोपी को राहत नहीं मिलेगी और कानूनी प्रक्रिया पूरी सख्ती से अपनाई जाएगी।
नान घोटाले में कई वरिष्ठ अफसरों के नाम सामने आ चुके हैं और यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि अब आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर ही निर्भर करेगी। न्यायपालिका और जांच एजेंसियों का यह सख्त रुख आरोपियों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
