रायपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों ने आज सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने का फैसला किया है। तूता मैदान में 10 हजार से अधिक कर्मचारियों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। उनका आंदोलन “जेल भरो” के रूप में होगा, जहां हजारों कर्मचारी स्वेच्छा से गिरफ्तारी देंगे।
कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी नौकरी की सुरक्षा और नियमितिकरण की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने के बजाय 600 से अधिक कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। यह कदम उनके मनोबल को तोड़ने के बजाय आंदोलन को और भी तेज कर गया है।
स्वास्थ्य मिशन से जुड़े ये कर्मचारी प्रदेश के दूर-दराज इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। विशेषकर महामारी के समय, उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना जनता की सेवा की। अब जब उनकी नौकरी पर संकट आया है, तो वे इसे अन्याय मानते हुए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
सरकार की ओर से कहा गया है कि बर्खास्त किए गए कर्मचारियों ने सेवा शर्तों का उल्लंघन किया और अनुशासनहीनता दिखाई, इस कारण कठोर कदम उठाना पड़ा। लेकिन कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज दबाने और आंदोलन को कमजोर करने के लिए ऐसे फैसले ले रही है।
यह संघर्ष सिर्फ कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव नहीं है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। अगर हजारों कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ती है, तो ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य ढांचे पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही, राजनीतिक रूप से भी यह मुद्दा सरकार के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करती है या आंदोलन और टकराव की दिशा में आगे बढ़ता है।
