छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से बड़े स्तर पर टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। जीएसटी विभाग ने छापेमारी कर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा किया है। जांच में पाया गया कि फर्जी कंपनियों के नाम पर अरबों रुपए के बिल बनाए गए और इससे राज्य सरकार को भारी राजस्व हानि हुई।
घोटाले का खुलासा:
विभाग की जांच में यह सामने आया कि 26 फर्जी फर्मों का इस्तेमाल कर ₹822 करोड़ के बिल जनरेट किए गए। जबकि इन फर्मों ने वास्तविक कारोबार केवल ₹106 करोड़ का दिखाया। इस अंतर से यह स्पष्ट हो गया कि करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी हुई है। अनुमानित हानि लगभग ₹100 करोड़ बताई जा रही है।
मास्टरमाइंड की भूमिका:
इस घोटाले का मास्टरमाइंड एक टैक्स सलाहकार बताया जा रहा है, जो इस समय फरार है। उसने न केवल फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराया बल्कि अपने साथियों की मदद से ई-वे बिल और रिटर्न दाखिल कर पूरे नेटवर्क को संचालित किया।
जब्ती और सबूत:
छापेमारी के दौरान विभाग को ₹1.64 करोड़ नकद और सोने के बिस्किट मिले। साथ ही फर्जी फर्मों से जुड़े कई अहम दस्तावेज, किरायानामा और एफिडेविट भी जब्त किए गए हैं। ये सभी दस्तावेज यह साबित करते हैं कि पूरे नेटवर्क ने योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी की।
असर और निहितार्थ:
इस तरह की फर्जीवाड़ा गतिविधियां न केवल सरकार को राजस्व से वंचित करती हैं बल्कि आम जनता पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ता है। विकास योजनाओं और कल्याणकारी कार्यों के लिए आवश्यक धनराशि की कमी हो जाती है।
