पाकिस्तान की ओर से भेजे गए ड्रोन भारत की सुरक्षा प्रणाली के सामने टिक नहीं पाए और भारत ने उन्हें सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। इस कार्रवाई से पाकिस्तान को बड़ा नुकसान हुआ। इस घटना के बाद पाकिस्तान में चिंता का माहौल देखने को मिला और उसके नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के सैन्य उपयोग को लेकर वैश्विक बहस छेड़ दी।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा कि AI का इस्तेमाल दबाव बनाने या तकनीकी एकाधिकार के लिए नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भी यह मांग रखी कि युद्ध और मिलिट्री क्षेत्र में AI के इस्तेमाल को यूनाइटेड नेशन चार्टर के तहत लाकर इसके लिए स्पष्ट और सख्त नियम बनाए जाएं।
आज की दुनिया में युद्ध के तरीके बदल रहे हैं। कई देश ऑटोनॉमस ड्रोन में AI तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ड्रोन पहचान करने, ट्रैकिंग करने और सटीक निशाना लगाने में सक्षम होते हैं। यही कारण है कि रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर भारत-पाकिस्तान सीमा तक, हर जगह AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल देखा जा रहा है।
AI हथियारों को तेज, अधिक प्रभावी और खतरनाक बना देती है। हालांकि, इसका अनियंत्रित इस्तेमाल बड़े पैमाने पर तबाही भी ला सकता है। यही वजह है कि कई देश युद्ध और सुरक्षा क्षेत्र में AI तकनीक को नियमों के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा इस मुद्दे को UN में उठाया जाना खास महत्व रखता है, क्योंकि हाल ही में “ऑपरेशन सिंधुर” में बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल हुआ था।
इससे यह स्पष्ट है कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि AI और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकें निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
