वॉशिंग्टन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वैश्विक व्यापार जगत को चौंकाते हुए ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% आयात टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। यह नियम 1 अक्टूबर से लागू होगा।
इस फैसले का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा, क्योंकि भारत अमेरिका को करीब 30% दवाओं का निर्यात करता है।
क्या है नया नियम
ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% शुल्क लगेगा। सिर्फ वही कंपनियां छूट पाएंगी, जो अमेरिका में दवा निर्माण संयंत्र बना रही हों या जिनके प्लांट निर्माणाधीन हों। ट्रम्प ने कहा – “जो हमारे यहां फैक्ट्री लगाएगा, उसी की दवा अमेरिका में बिकेगी, बाकी को टैरिफ देना होगा।”

भारत पर क्या असर
भारत का फार्मा सेक्टर दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा सप्लायर है। भारत से अमेरिका को दवा निर्यात का बड़ा हिस्सा जेनेरिक मेडिसिन्स का है, लेकिन कई कंपनियां ब्रांडेड और स्पेशलाइज्ड दवाएं भी बेचती हैं। Sun Pharma, Dr. Reddy’s, Cipla, Biocon जैसी कंपनियों के शेयरों में खबर के बाद गिरावट देखी गई।विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल जेनेरिक पर असर कम होगा, लेकिन भविष्य में अगर टैरिफ का दायरा बढ़ा तो भारत की फार्मा इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है।
अमेरिकी पॉलिसी का असर और चुनौती
- उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ेंगी: दवाओं की कीमत अमेरिका में और महंगी हो सकती है।
- भारत को नुकसान: भारत से होने वाला फार्मा एक्सपोर्ट सीमित हो सकता है।
- ग्लोबल ट्रेड वॉर का खतरा: यूरोप और एशिया के देशों से भी अमेरिका के फैसले पर नाराजगी जताई जा रही है।
- इंवेस्टमेंट दबाव: कंपनियां अमेरिका में निवेश करने को मजबूर हो सकती हैं, ताकि टैरिफ से बचा जा सके।
विशेषज्ञों की राय
एनालिस्ट्स का कहना है कि ट्रम्प का यह फैसला ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी का हिस्सा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स मानते हैं कि “यह भारत जैसे देशों के लिए झटका जरूर है, लेकिन जेनेरिक दवाओं की बड़ी सप्लाई के कारण भारत की पकड़ बनी रहेगी।”
