September 5, 2026
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बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का आज शाम 4 बजे ऐलान — छठ के बाद दो चरणों में हो सकता मतदान

बिहार की सियासत एक बार फिर चुनावी रंग में रंगने जा रही है। विधानसभा चुनाव 2025 के कार्यक्रम की घोषणा आज शाम 4 बजे चुनाव आयोग करेगा। पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल तेज़ है और हर दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। यह चुनाव न केवल सत्ता के लिए मुकाबला होगा, बल्कि सामाजिक समीकरणों और विकास के मुद्दों पर जनमत की बड़ी परीक्षा भी साबित होगा।

चुनाव की पृष्ठभूमि

बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। इस वजह से चुनाव आयोग को उससे पहले नया विधानसभा गठन कराना अनिवार्य है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार चुनाव दो चरणों में कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में आज यह साफ हो जाएगा कि मतदान किन तारीखों में होगा और मतगणना कब होगी।

🔹 छठ पर्व के बाद चुनाव की मांग

बिहार में छठ पर्व का अत्यंत धार्मिक और भावनात्मक महत्व है। इस वर्ष छठ पर्व 25 से 28 अक्टूबर के बीच मनाया जाएगा। सभी प्रमुख दल — चाहे वह राजद हो, जद (यू), भाजपा या कांग्रेस — ने चुनाव आयोग से यह अनुरोध किया है कि मतदान की तारीखें छठ पर्व के बाद रखी जाएं।

उनका तर्क है कि छठ के समय बड़ी संख्या में लोग बाहर से बिहार लौटते हैं और त्योहार के तुरंत बाद वे अपने गांवों में मतदान में भाग ले सकते हैं। यदि चुनाव त्योहार के बीच आयोजित हुए, तो बड़ी संख्या में मतदाता वोट नहीं डाल पाएंगे।

चरणबद्ध मतदान पर राय

राजनीतिक दलों में एक राय यह भी बनी है कि चुनाव कम से कम चरणों में कराए जाएं। कई दल एक ही चरण में मतदान कराने के पक्ष में हैं, ताकि प्रशासनिक बोझ और खर्च कम हो, वहीं आयोग की योजना दो चरणों की मानी जा रही है जिससे सुरक्षा व्यवस्था और लॉजिस्टिक प्रबंधन बेहतर रह सके

प्रमुख चुनौतियाँ

इस बार चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को “शुद्ध” करने का दावा किया है। आयोग के अनुसार, पिछले 22 वर्षों में पहली बार मतदाता सूची का पूर्ण संशोधन किया गया है। हालांकि, कई राजनीतिक दलों ने नाम कटौती और त्रुटियों को लेकर सवाल उठाए हैं।

इसके अलावा, सुरक्षा बलों की तैनाती, चुनावी सामग्री का परिवहन, ईवीएम की उपलब्धता और त्योहारों के बाद प्रशासनिक मशीनरी की पुनर्स्थापना भी एक बड़ी चुनौती होगी।

मतदाताओं की भूमिका

बिहार के मतदाता हर बार बदलाव और विकास के मुद्दों पर निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। इस बार भी शिक्षा, रोजगार, महंगाई, कानून व्यवस्था, और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। छठ पर्व के बाद मतदान होने से अधिक मतदाताओं के भाग लेने की उम्मीद है।

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