कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी गोवर्धन पूजा का महापर्व पूरे श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भक्तों ने पारंपरिक रूप से गौ माता की पूजा-अर्चना की तथा गोबर से गोवर्धन पर्वत का निर्माण कर विधिवत पूजा की। मठ परिसर में ठाकुर जी को छप्पन भोग अर्पित किया गया, वहीं छत्तीसगढ़ी संस्कृति को दर्शाते हुए 200 से अधिक व्यंजनों का कलेवा भोग लगाया गया। इस वर्ष पहली बार गर्भगृह को धान की बालियों से विशेष रूप से सजाया गया, जो प्रदेश की कृषि परंपरा को सुंदर रूप में प्रदर्शित करता है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। गौ माता को श्रृंगारित कर पूजा की गई तथा फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भक्तों ने गोबर से एक-दूसरे को तिलक लगाकर गोवंश की वृद्धि और समृद्धि की कामना की।
महामंडलेश्वर राजेश्री महंत रामसुन्दर दास जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि गोवर्धन पूजा का पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के अहंकार को परास्त करने की याद में मनाया जाता है। यह परंपरा हमारे पूर्वजों से निरंतर चली आ रही है और सनातन धर्म के लिए अत्यंत पवित्र है।
कार्यक्रम में उपस्थित विशेष अतिथि एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह अन्नकूट का भी त्योहार है। यह हमारे सनातन धर्म और लोक परंपरा का अभिन्न अंग है। वहीं ट्रस्ट कमेटी के सदस्य अजय तिवारी ने कहा कि यह पर्व देव पूजन के साथ-साथ प्रकृति पूजा का प्रतीक भी है। जंगल, नदी, पहाड़ हमारे धर्म शास्त्रों में देवतुल्य माने गए हैं — यह प्रकृति संरक्षण का सर्वोत्तम उदाहरण है।
इस अवसर पर दाऊ महेंद्र अग्रवाल, सुरेश शुक्ला, रमेश यदु, चंद्रकांत यदु, जगन्नाथ अग्रवाल, पुजारी सुमित तिवारी, मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव, हर्ष दुबे सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में भक्ति, आस्था और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक देखने को मिली।
