रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और डीआईजी (सीटीएनएस/एससीआरबी) डॉ. संतोष सिंह ने अपने अंतरराष्ट्रीय शोध कार्य से भारत को गौरवान्वित किया है। उनकी नई पुस्तक ‘Institutionalization of Peacebuilding: Functionaries of United Nations Peacebuilding Commission in Sierra Leone & Burundi’ का विमोचन नई दिल्ली में प्रतिष्ठित मानक पब्लिकेशन द्वारा किया गया। यह पुस्तक संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों और भारत की भूमिका पर आधारित एक गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
विमोचन के उपरांत डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और डीजीपी अरुण देव गौतम को पुस्तक की प्रति भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
वैश्विक संदर्भ में शांति की नई परिभाषा
डॉ. सिंह की यह शोध पुस्तक 21वीं सदी के बदलते अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के स्वरूप को विस्तार से समझाती है।
शीत युद्ध के बाद दुनिया के कई हिस्सों में केवल शांति-रक्षा (Peace Keeping) पर्याप्त नहीं रही। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र ने शांति-स्थापना (Peace Making), शांति-निर्माण (Peace Construction) और शांति-सुदृढ़ीकरण (Peace Building) जैसे नए प्रयासों पर बल दिया।
डॉ. सिंह ने अपने अध्ययन में बताया है कि संयुक्त राष्ट्र की Peacebuilding Commission युद्धोत्तर समाजों में स्थायी शांति, पुनर्निर्माण, सुशासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती में निर्णायक भूमिका निभा रही है।
विश्व शांति में भारत का योगदान
पुस्तक में भारत की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत 1950 से अब तक 49 संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में शामिल रहा है।
भारत ने लगभग 2 लाख शांति सैनिकों को दुनिया के विभिन्न संघर्षग्रस्त देशों में भेजा है, जिसमें सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अधिकारी शामिल हैं।
इस योगदान के चलते भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा शांति सैनिक योगदानकर्ता देश माना जाता है।
शोध और शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान
डॉ. संतोष सिंह की शैक्षणिक उपलब्धियां भी अत्यंत प्रेरक हैं। उन्होंने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग से पीएचडी प्राप्त की है, जबकि जेएनयू, नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय में एम.फिल और बीएचयू, वाराणसी से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया है।
एम.फिल के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों की भूमिका पर शोध प्रस्तुत किया था। उनके कई शोधपत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं।
