सिंहदेव का कहना है कि फ़ॉर्म न तो सही तरीक़े से लोगों तक पहुँचा है और न ही इसकी प्रक्रिया स्पष्ट है। कई मीडिया कर्मियों, कार्यकर्ताओं तथा ग्रामीणों को अब तक फ़ॉर्म नहीं मिला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया जल्दबाज़ी में लागू की गई है, जबकि खेती-किसानी के कारण ग्रामीण बेहद व्यस्त हैं। इसलिए पार्टी ने SIR की समय सीमा को 3 महीने बढ़ाने की औपचारिक मांग चुनाव आयोग से की है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी महिला की शादी 2003 के बाद हुई है, तो उसका नाम उस सूची में नहीं मिलेगा, क्योंकि SIR प्रक्रिया में 2003 की लिस्ट को आधार बनाया गया है। ऐसे में ग्रामीणों को अपने माता-पिता का नाम, पुरानी सूची में घर-परिवार के रिकॉर्ड ढूंढकर फ़ॉर्म भरना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि “अगर प्रक्रिया को सही और कड़ाई से लागू किया गया तो आधे से ज़्यादा नाम सूची से हट सकते हैं, क्योंकि कई लोग पुरानी लिस्ट में नहीं मिलेंगे या फ़ॉर्म सही नहीं आएंगे।”
कांग्रेस ने प्रदेश कार्यालय में कंट्रोल रूम और मास्टर ट्रेनर तैनात किए हैं, जो जिलों से आने वाली शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करेंगे। साथ ही सभी जिलों में मास्टर ट्रेनर बूथ लेवल एजेंटों तथा कार्यकर्ताओं को प्रक्रिया समझाएंगे ताकि बिना वजह किसी मतदाता का नाम न कटे।पार्टी ने चुनाव आयोग से यह भी मांग की है किBLO घर-घर जाकर सत्यापन करें,ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में फोटोखिंचवाने या कॉपी कराने की सुविधा न होने पर आयोग स्वयं खर्च वहन करे,
फ़ॉर्म सही न मिलने पर मतदाता को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर दिया जाए।
प्रदेश में अब तक SIR के गणना फ़ॉर्म का लगभग 97% वितरण हो चुका है, जबकि केवल 6.61% फ़ॉर्म डिजिटलाईज किए जा सके हैं। देश के 12 राज्यों में SIR प्रक्रिया चल रही है और रैंकिंग में छत्तीसगढ़ 10वें स्थान पर है। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में गोवा पहले स्थान पर है।
सिंहदेव ने चेतावनी दी कि यदि SIR प्रक्रिया इसी तरह आगे बढ़ी तो प्रदेश के लाखों वैध मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो सकते हैं, जो लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती है।
