July 21, 2026
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दिल्ली अस्पताल से नाटकीय गिरफ्तारी: गोवा क्लब आगकांड में वांछित अजय गुप्ता पकड़ा गया, पुलिस की कई दिन की तलाश हुई पूरी

गोवा के ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइट क्लब में हुई भीषण आग की घटना के बाद से फरार चल रहे तीसरे मालिक अजय गुप्ता को आखिरकार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अस्पताल से गिरफ्तार कर लिया। गोवा और दिल्ली पुलिस कई दिनों से उसकी तलाश में थी और उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था, लेकिन वह लगातार लोकेशन बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था।

9 दिसंबर को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को इनपुट मिला कि अजय गुप्ता अभी भी दिल्ली में ही मौजूद है। इसके बाद पुलिस ने अलर्ट मोड में आकर उसकी गतिविधियों को ट्रैक करना शुरू कर दिया। जांच में पता चला कि वह अपने ड्राइवर के साथ HR नंबर की इनोवा गाड़ी में घूम रहा था और लाजपत नगर के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रेन एंड स्पाइन’ अस्पताल में भर्ती हुआ है। माना जा रहा है कि उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल में दाखिला लिया था, लेकिन पुलिस उसकी लोकेशन पर लगातार नज़र रखे हुए थी।

पुलिस टीम जब 10 दिसंबर की सुबह अस्पताल पहुंची तो अजय गुप्ता को वहीं दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा हिरासत में ले लिया गया, जहां से उसे आगे गोवा ले जाया जाएगा। गोवा पुलिस उससे क्लब में लगी आग को लेकर पूछताछ करेगी, जिसमें भारी आर्थिक क्षति और कई संदिग्ध लेन-देन के सुराग मिले हैं।

अजय गुप्ता के बारे में जांच में यह भी सामने आया है कि वह दिल्ली के मशहूर बिल्डर अमित गुप्ता का भाई है, जिसकी दो वर्ष पहले बुराड़ी में हत्या कर दी गई थी। उस मामले में गोगी गैंग का हाथ सामने आया था। अमित गुप्ता के पास कई लोगों का पैसा मार्केट में लगा हुआ था, और उसकी मौत के बाद अजय गुप्ता ने यह काम संभाला। क्लब में भी अमित और अजय दोनों ने मिलकर बड़ी रकम निवेश की थी।

गोवा क्लब के मालिकों में शामिल सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा पहले ही थाईलैंड भाग चुके हैं और उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी है। एक और पार्टनर सुरिंदर कुमार खोसला के खिलाफ भी लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है। इस पूरे मामले में अब तक छह गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं और पुलिस क्लब में हुए ट्रांजेक्शन व आर्थिक गतिविधियों की जांच कर रही है।

गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान अजय गुप्ता ने पुलिस को बताया कि वह क्लब में केवल एक “स्लीपिंग पार्टनर” था और उसे क्लब के अन्य संचालन व लेन-देन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हालांकि पुलिस उसके इस दावे की जांच कर रही है और उसके GST सर्टिफिकेट और वित्तीय दस्तावेजों को खंगाल रही है।

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