दुबई में आयोजित अंडर-19 एशिया कप 2025 के फाइनल मुकाबले के बाद पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान एक असामान्य लेकिन स्पष्ट संदेश देखने को मिला। भारतीय टीम के खिलाड़ियों ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष और एशियन क्रिकेट काउंसिल से जुड़े अधिकारी मोहसिन नक़वी की मौजूदगी में मुख्य मंच पर जाने से परहेज़ किया और उनसे कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया। यह कदम खेल से इतर एक गहरे भावनात्मक और नैतिक पक्ष को दर्शाता है, जिसने पूरे समारोह का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान ने भारत को 191 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया। मैच समाप्त होने के बाद जब विजेता और उपविजेता टीमों को सम्मानित किए जाने का समय आया, तो पाकिस्तानी टीम को मंच पर पदक प्रदान किए गए। इस दौरान भारतीय टीम ने मुख्य मंच पर जाने के बजाय मैदान के किनारे मौजूद आईसीसी अधिकारी से अपने पदक प्राप्त किए। खिलाड़ियों ने न तो मंच साझा किया और न ही किसी प्रकार का हाथ मिलाया।
भारतीय टीम के इस रवैये को केवल खेल भावना से जोड़कर नहीं देखा गया, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और राष्ट्रीय संवेदनाओं का संदर्भ सामने आया। मोहसिन नक़वी का दोहरा दायित्व—एक ओर क्रिकेट प्रशासक और दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार में गृह मंत्री—भारतीय पक्ष के लिए असहजता का कारण बताया गया। खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन का मानना है कि ऐसे अधिकारियों के साथ औपचारिक मेल-मिलाप उन शहीदों और उनके परिवारों की भावनाओं के विपरीत हो सकता है, जिन्होंने सीमा पार आतंकवाद में अपने प्राण गंवाए हैं।
यह पहला अवसर नहीं है जब भारतीय टीम ने इस प्रकार का रुख अपनाया हो। इससे पहले भी एशिया कप और अन्य अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में ‘नो हैंडशेक’ या मंच से दूरी जैसे संकेत दिए जा चुके हैं। इन घटनाओं को भारत की उस नीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें खेल के मंच पर भी राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील मुद्दों को अनदेखा नहीं किया जाता।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि खेल भले ही देशों को जोड़ने का माध्यम माना जाता हो, लेकिन कुछ परिस्थितियों में राष्ट्रीय सरोकार और भावनाएं खेल से ऊपर आ जाती हैं। भारतीय खिलाड़ियों का यह कदम शांत, अनुशासित और प्रतीकात्मक था, जिसने बिना किसी बयान के अपना संदेश मजबूती से सामने रखा।
