केरल के पलक्कड़ जिले में हुई दिल दहला देने वाली मॉब लिंचिंग की घटना ने एक बार फिर देश में भीड़तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ के रहने वाले एक प्रवासी मजदूर को कथित तौर पर “बांग्लादेशी” समझकर कुछ लोगों ने घेर लिया और बेरहमी से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। घायल अवस्था में मजदूर को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद केरल सरकार ने मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार ने 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। मुआवजे की राशि से परिवार के भरण-पोषण और बच्चों के भविष्य की व्यवस्था की जाएगी।
पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। यह घटना प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और अफवाहों के आधार पर की जा रही हिंसा पर गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
