मध्यप्रदेश सरकार ने चालू वित्त वर्ष में बाजार से बड़े पैमाने पर कर्ज उठाया है। वर्ष के अंत से ठीक पहले 3,500 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने के साथ ही पूरे वित्त वर्ष में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 53,100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कर्ज विभिन्न किस्तों में आरबीआई के माध्यम से लिया गया है, जिसका भुगतान अलग–अलग अवधि में किया जाएगा।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में राज्य की आय 2,34,026.05 करोड़ रुपये रही, जबकि खर्च 2,21,538.27 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस तरह सरकार ने 12,487.78 करोड़ रुपये का सरप्लस दिखाया। वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने 2,62,009.01 करोड़ रुपये की अनुमानित आय और 2,60,983.10 करोड़ रुपये का खर्च बताया है, जिससे लगभग 1,025.91 करोड़ रुपये का सरप्लस रहने का दावा किया गया है। सरकार का कहना है कि लिया गया कर्ज तय सीमा के भीतर है।
कर्ज की समय-सीमा पर नजर डालें तो अलग-अलग तिथियों में 16 साल से लेकर 23 साल तक की अवधि के लिए ऋण लिया गया है। हाल ही में लिया गया 1,200 करोड़ रुपये का कर्ज 5 साल की अवधि का है, जिसका भुगतान ब्याज सहित 31 दिसंबर 2030 तक किया जाएगा। इसी तरह 1,200 करोड़ रुपये का दूसरा कर्ज 11 साल के लिए और 1,100 करोड़ रुपये का तीसरा कर्ज 23 साल की अवधि में चुकाया जाएगा।
सरकार का दावा है कि यह कर्ज खर्च के लिए नहीं, बल्कि निवेश के तौर पर लिया गया है। इस राशि का उपयोग कृषि योजनाओं, सिंचाई परियोजनाओं, पावर प्रोजेक्ट्स और कम्युनिटी डेवलपमेंट जैसे विकास कार्यों में किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह कर्ज प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दीर्घकालीन विकास को गति देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
हालांकि, बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार पर पहले से ही भारी कर्ज का बोझ है और नए ऋण से आने वाली पीढ़ियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। वहीं सरकार का तर्क है कि वित्तीय अनुशासन के साथ कर्ज लिया जा रहा है और इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
