रायपुर। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में लगी आग की घटना को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। आग किन परिस्थितियों में लगी और इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं, इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है। टीम को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह पांच दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।
आग की यह घटना कार्यालय परिसर के उस हिस्से में हुई, जहां विभागीय रिकॉर्ड और जरूरी फाइलें रखी जाती थीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग से कई दस्तावेज आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे शिक्षा विभाग के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अब तक नुकसान का पूरा आकलन नहीं हो पाया है।
जांच टीम आग लगने के हर पहलू की बारीकी से जांच करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि कहीं बिजली व्यवस्था में खामी या शॉर्ट सर्किट तो वजह नहीं बना, या फिर आग जानबूझकर लगाई गई। इसके अलावा आग लगने के समय कार्यालय में मौजूद सुरक्षा इंतजाम, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, कर्मचारियों की मौजूदगी और फायर सेफ्टी मानकों का पालन हुआ या नहीं—इन सभी बिंदुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि हाल के समय में विभागीय फाइलों और रिकॉर्ड से जुड़े मामलों को देखते हुए इस घटना को हल्के में नहीं लिया जा रहा है। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है या आग लगाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, जिला प्रशासन का यह भी मानना है कि इस जांच से न सिर्फ इस घटना की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि भविष्य में सरकारी कार्यालयों में आगजनी जैसी घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
