महात्मा गांधी की पुण्यतिथि जैसे पावन अवसर पर पूरे देश में सामान्यतः ‘ड्राई डे’ घोषित किया जाता है, ताकि उनकी विचारधारा, अहिंसा, संयम और नशामुक्त समाज की सोच को सम्मान दिया जा सके। यह दिन केवल एक औपचारिक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्र के नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यदि इस दिन शराब की बिक्री होती है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि सामाजिक मूल्यों पर गहरा प्रहार माना जाता है।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि गांधी जी का संपूर्ण जीवन नशामुक्त समाज की स्थापना के लिए समर्पित था। वे मानते थे कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को कमजोर करता है। इसके बावजूद यदि उनकी पुण्यतिथि पर शराब की दुकानों को खुला रखा जाता है, तो यह सीधे-सीधे गांधी जी की विचारधारा का अपमान है।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार राजस्व कमाने के उद्देश्य से नैतिक मूल्यों की अनदेखी कर रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार का झुकाव समाज सुधार की बजाय केवल आर्थिक लाभ की ओर दिखाई देता है, जिससे यह संदेश जाता है कि सत्ता के लिए आदर्शों से समझौता किया जा रहा है। यह स्थिति युवाओं और समाज पर गलत प्रभाव डालती है और नशाखोरी को सामाजिक रूप से सामान्य बनाने का खतरा पैदा करती है।
कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना है कि गांधी जी का सपना एक ऐसे भारत का था जहाँ समाज नशामुक्त, आत्मनिर्भर और नैतिक रूप से मजबूत हो। लेकिन वर्तमान नीतियाँ उस सोच के विपरीत दिशा में जाती दिख रही हैं। यही कारण है कि कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन और धरना देने का ऐलान किया है, ताकि सरकार की नीतियों को जनता के सामने बेनकाब किया जा सके और समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया जा सके।
कुल मिलाकर, यह विवाद केवल शराब बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मूल्यों, विचारधाराओं और शासन की प्राथमिकताओं का प्रश्न बन चुका है। गांधी जी की पुण्यतिथि जैसे पवित्र दिन पर उठे इस मुद्दे ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या आज की राजनीति नैतिकता और आदर्शों से दूर होती जा रही है, या फिर समाज अभी भी गांधीवादी विचारों को जीवित रखने की ताकत रखता है।
