रायपुर संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं की भव्य झलक देखने को मिली। लालबाग मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री ने विभिन्न प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और आदिवासी समाज के जीवन, हस्तशिल्प तथा पारंपरिक कलाओं को करीब से समझा। उन्होंने कलाकारों और प्रतिभागियों से संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की तथा कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है, जिसे सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, चित्रकला, शिल्प, आभूषण और वेशभूषा जैसी विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर, नारायणपुर और बीजापुर सहित विभिन्न जिलों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रदर्शनी में टेराकोटा, वुड कार्विंग, बांस एवं लौह शिल्प, तुमा कला और वन औषधियों से जुड़े स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
स्थानीय व्यंजन स्टॉलों पर भी लोगों की भारी भीड़ देखी गई, जहाँ मंडिया पेज, जोधरी लाई के लड्डू, चापड़ा चटनी, कुल्थी दाल और पारंपरिक पेय पदार्थों का स्वाद लोगों ने लिया। इस आयोजन ने न केवल जनजातीय संस्कृति की विविधता को मंच दिया बल्कि कलाकारों को प्रोत्साहन और पहचान भी दिलाई। समापन समारोह में विजेता दलों को सम्मानित किया गया और पूरे आयोजन ने बस्तर की सांस्कृतिक समृद्धि और परंपराओं की जीवंतता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
