कोरबा जिले में अडानी समूह द्वारा संचालित पावर प्लांट के प्रस्तावित विस्तार को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। बताया जा रहा है कि संयंत्र के विस्तार की योजना के तहत लगभग 1600 मेगावाट क्षमता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए जनसुनवाई की प्रक्रिया भी प्रारंभ होने वाली है। हालांकि जनसुनवाई से पहले ही प्रभावित गांवों के लोगों में असंतोष स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस विस्तार से उनके गांवों पर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है, जिससे उनकी आजीविका और रहने-सहने की व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।
इसी मुद्दे को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने संगठित होकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपकर संरक्षण एवं हस्तक्षेप की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा पूर्व में किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं, जिससे लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
पूर्व मंत्री ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुनते हुए समर्थन का आश्वासन दिया और कहा कि आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए वे सदैव खड़े रहेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने कोरबा क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और संयंत्र प्रबंधन ग्रामीणों की चिंताओं को किस प्रकार संबोधित करते हैं और प्रस्तावित विस्तार योजना पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
