छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के बानीपाथर गांव में स्थित मंगल कार्बन प्लांट में 5 फरवरी 2026 को एक भयानक औद्योगिक हादसा हुआ। सुबह के समय प्लांट में पुराने टायर गलाने की प्रक्रिया के दौरान अचानक फर्नेस या मिक्सिंग यूनिट के ढक्कन का खुल जाना और ऑक्सीजन के संपर्क में आने से जोरदार ब्लास्ट व आग लग गई, जिससे वहां काम कर रहे श्रमिकों सहित एक मासूम बच्ची भी गंभीर रूप से झुलस गए।
ब्लास्ट में झुलसे कुल आठ व्यक्ति को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में 9 माह की बच्ची भूमि खड़िया की स्थिति गंभीर थी, और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके कुछ दिन बाद, उसके पिता शिव खड़िया (27 वर्ष) और उसके दादा साहेब खड़िया (45-46 वर्ष) तथा एक अन्य मजदूर इंदीवर (19 वर्ष) ने भी गंभीर चोटों के कारण दम तोड़ दिया। इन सभी मृतकों में तीन एक ही परिवार के सदस्य थे, जिसने पूरे इलाके में मातम फैला दिया।
हादसे के बाद अस्पताल और गांव में परिवार का दर्दनाक दृश्य देखने को मिला। पिता-दादा की अर्थी उनके पुत्र व पोते के शव के पास रखी गयी, और बूढ़ा पिता अंत तक शव के पास बैठा रहा, जबकि बहू बिलख-बिलखकर रोती नजर आई। खास बात यह थी कि 1 दिन पहले ही पोती का अंतिम संस्कार हो चुका था। स्थिति इतनी संवेदनशील थी कि परिजन और ग्रामीण भावनात्मक रूप से टूट गए।
घटना ने मजदूर सुरक्षा के मानकों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि प्लांट में सुरक्षा उपकरणों और मानकों के अभाव के कारण यह हादसा हुआ। घटना के बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को आंशिक सहायता और शिक्षा एवं शादी के खर्च की जिम्मेदारी उठाने का आश्वासन दिया, जबकि ग्रामीणों ने उचित मुआवजा और दुर्घटना के निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर नेशनल हाईवे-49 पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन भी किया।
यह दुर्घटना केवल एक परिवार को उजाड़ने वाली घटना नहीं है, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा की उपेक्षा की याद दिलाती है, जिस पर गंभीरता से सोचना और उचित सुधार करना बेहद आवश्यक है।
