बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पेंशन निर्धारण और भुगतान से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस एन.के. व्यास की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी ने सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के पैरा 11(3) के तहत उच्च पेंशन का विकल्प चुना है और इसके लिए अतिरिक्त अंशदान भी जमा किया है, तो उसे बढ़ी हुई पेंशन पाने का अधिकार है। ऐसे मामलों में केवल पहले रिटायर होने के आधार पर पेंशन कम नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मूल योजना में उच्च पेंशन चुनने के लिए कोई कट-ऑफ तिथि तय नहीं थी। इसलिए जिन कर्मचारियों ने नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर उच्च पेंशन का विकल्प चुना है, उन्हें इसका लाभ मिलना ही चाहिए। अदालत ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा पेंशन राशि कम करने के आदेश को निरस्त करते हुए इसे अनुचित ठहराया।
यह मामला डेयरी फेडरेशन और केंद्रीय सहकारी बैंक से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों—लालमन साहू, गणेश प्रसाद सहित अन्य कर्मचारियों से जुड़ा है। इन कर्मचारियों ने सेवानिवृत्ति से पहले निर्धारित फॉर्म भरकर उच्च पेंशन का विकल्प चुना था और इसके लिए अतिरिक्त राशि भी जमा कराई थी। शुरुआत में EPFO ने उन्हें लगभग 2,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन देना शुरू किया, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 18,000 रुपये तक किया गया। लेकिन कुछ समय बाद EPFO ने पेंशन राशि को फिर से कम कर दिया।
इस निर्णय के खिलाफ कर्मचारियों ने अधिवक्ता नीरज चौब और अन्य वकीलों के माध्यम से हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि जब कर्मचारियों ने उच्च पेंशन के लिए आवश्यक अतिरिक्त अंशदान जमा कर दिया है, तो उन्हें बढ़ी हुई पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की दलीलों को सही मानते हुए EPFO के आदेश को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि कर्मचारियों को उनकी पात्रता के अनुसार पेंशन का भुगतान किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित कर्मचारियों को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इस फैसले से प्रदेश सहित देशभर के उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने उच्च पेंशन के लिए विकल्प चुना था।
