रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को शून्यकाल में दुर्ग जिले में कथित अवैध अफीम की खेती का मुद्दा जोर-शोर से उठा। इस विषय को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिससे सदन का माहौल कुछ समय के लिए काफी गरमा गया। विपक्ष ने सरकार पर अफीम की खेती को संरक्षण देने का आरोप लगाया, जबकि सरकार की ओर से पुलिस की कार्रवाई और बड़ी मात्रा में अफीम जब्त किए जाने की जानकारी दी गई।
शून्यकाल के दौरान विपक्ष की ओर से डॉ. चरणदास महंत ने इस मामले को उठाते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में धान की खेती को बढ़ावा देने के बजाय अफीम की खेती को प्रोत्साहन मिलने जैसी स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है, लेकिन मौजूदा हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि इसे “अफीम का कटोरा” बनाने की कोशिश हो रही है।
डॉ. महंत ने यह भी आरोप लगाया कि दुर्ग जिले में सामूहिक संरक्षण के तहत अफीम की खेती कराई गई है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि या तो इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए या फिर विधायकों की एक समिति बनाकर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
वहीं सत्ता पक्ष की ओर से मंत्री अजय चंद्राकर ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस पर ही संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई है और बड़ी मात्रा में अफीम जब्त भी की गई है।
इस दौरान भूपेश बघेल ने भी हस्तक्षेप करते हुए एफआईआर की कॉपी का जिक्र किया और कहा कि एफआईआर में विनायक ताम्रकार का नाम नहीं है, बल्कि उनके नौकर का नाम दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से मुख्य आरोपी के रूप में विनायक ताम्रकार का नाम सामने आने की बात कही जा रही है, जिससे पूरे मामले में भ्रम की स्थिति बन गई है।
अफीम की खेती के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिसके कारण सदन का माहौल कुछ समय तक काफी गरमाया रहा। दोनों पक्षों के विधायक एक-दूसरे पर आरोप लगाते नजर आए और मामले की जांच की मांग को लेकर बहस जारी रही।
