रायपुर. गणेशोत्सव नजदीक आते ही जिला प्रशासन ने पंडालों और मूर्ति स्थापना को लेकर गाइडलाइन जारी की है। अब कोई भी समिति या आयोजक सड़क या सार्वजनिक स्थान पर पंडाल लगाना चाहता है तो पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
क्या है नियम?
- अनुमति जरूरी: पंडाल लगाने से पहले जिला प्रशासन/नगर निगम से एनओसी लेना होगा।
- पंडाल का आकार सीमित: अधिकतम 15×15 फीट तक पंडाल की अनुमति।
- मूर्ति की ऊँचाई तय: 8 फीट से ज्यादा ऊँची प्रतिमा नहीं होगी।
- ध्वनि नियंत्रण: डीजे और धुमाल पर रोक, सिर्फ तय सीमा तक ही लाउडस्पीकर की अनुमति।
- यातायात बाधित नहीं होगा: पंडाल सड़क पर इस तरह न लगे जिससे ट्रैफिक जाम हो।
- सुरक्षा व्यवस्था: बिजली कनेक्शन के लिए विभागीय अनुमति अनिवार्य, अग्निशमन व्यवस्था भी करनी होगी
कोर्ट भी हुआ सख्त
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई है, जिसमें बिना परमिशन के पंडाल लगाने पर आपत्ति जताई गई। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या कोई स्पष्ट नीति बनी है? सरकार ने बताया कि 2022 के आदेश के अनुसार अनुमति अनिवार्य है, और अब नई पॉलिसी बनाई जा रही है। अगली सुनवाई 2 सितंबर 2025 को होगी।
आयोजकों से अपील
प्रशासन ने सभी गणेशोत्सव समितियों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करते हुए ही मूर्ति स्थापना और पंडाल सजावट करें, ताकि उत्सव शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया जा सके।
