केंद्र सरकार ने लगभग ₹70,000 करोड़ की योजना—Project 75 India (P-75I)—के तहत मज़गांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और जर्मनी की ThyssenKrupp Marine Systems (TKMS) के साथ 6 उन्नत पनडुब्बियों के निर्माण हेतु बातचीत शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी छह महीने की रुकावट के बाद दी गई है ।
1. जर्मनी के साथ पनडुब्बी सौदा — Project 75 India
यह कदम भारत की निर्माण क्षमता (Indigenous Capability) को मजबूत करने, विदेशी निर्भरता कम करने, और काफ़ी रणनीतिक महत्व रखता है ।
2. AIP तकनीक की ताकत:
ये पनडुब्बियाँ Air-Independent Propulsion (AIP) सिस्टम से लैस होंगी, जिससे ये लगभग 3 सप्ताह तक पानी के भीतर रह सकती हैं। यह भारत की सैन्य क्षमता और समुद्री गहराई में छिपकर संचालन की क्षमता दोनों में वृद्धि करेगा ।
3. रणनीतिक विचारधारा और इरादा:
यह फैसला हाई-लेवल सुरक्षा और रक्षा अधिकारियों की बैठक के बाद लिया गया, जहाँ चीन और पाकिस्तान की समुद्री ताकत के मुकाबले भारत की तैनाती पर चर्चा हुई थी ।
MDL और TKMS वर्तमान में इस सौदे के एकमात्र प्रतिस्पर्धी गठबंधन हैं, क्योंकि L&T–Navantia का प्रस्ताव बेकार करार दिया गया था—लॉजिक यह था कि उनकी AIP प्रणाली समुद्र-परखा (sea-proven) नहीं थी ।
4. अगले कदम और समयरेखा:
बातचीत इसी माह (अगस्त 2025) की अन्त तक शुरू होने की उम्मीद है, और छह माह के भीतर यह सौदा अंतिम रूप ले सकता है ।
यह पहला कदम एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें भारत भविष्य में पूरी तरह स्वदेशी पनडुब्बियों (Project 76) का निर्माण करने की दिशा में बढ़ रहा है ।
विवरण
सौदा ₹70,000 करोड़ में 6 पनडुब्बियाँ, जर्मनी के सहयोग से Tech AIP आधारित, 3 सप्ताह तक submerged क्षमता
- बातचीत कब शुरू अगस्त 2025 अंत में
- अनुमानित समय अवधी 6 माह में सौदा अंतिम रूप ले सकता है
- रणनीतिक उद्देश्य बेहतरीन नौसैनिक ताकत, आत्मनिर्भरता, चीन–पाक–भारतीय महासागर क्षेत्र में संतुलन
