भारत ने वायु रक्षा के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर हासिल किया है। DRDO और ISRO द्वारा विकसित Integrated Air Defence Weapon System (IADWS) यानी ‘सुदर्शन चक्र’ का पहला परीक्षण ओडिशा तट से सफलतापूर्वक किया गया। यह सिस्टम आने वाले वक्त में देश को आसमान से मिलने वाले हर खतरे के खिलाफ एक अभेद्य कवच देगा।
कैसे हुआ परीक्षण?
23 अगस्त को दोपहर लगभग 12:30 बजे ओडिशा तट से इसका पहला उड़ान परीक्षण किया गया। लक्ष्य को आसमान में ही इंटरसेप्ट कर गिरा दिया गया।
क्यों खास है ‘सुदर्शन चक्र’?
यह एक मल्टी लेयर डिफेंस सिस्टम है, जिसमें
- क्विक रिएक्शन मिसाइल (QRSAM)
- वी-शॉर्ट रेंज डिफेंस (VSHORADS)
- लेज़र बेस्ड डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW)
शामिल हैं। साथ ही इसमें AI आधारित रडार और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।
तकनीकी ताकत:
- 2,500 किमी तक मारक क्षमता
- 150 किमी ऊँचाई तक लक्ष्य नष्ट करने की क्षमता
- 5 किमी/सेकंड की रफ्तार
- बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज़ मिसाइल, ड्रोन और हाइपरसोनिक हथियारों को गिराने में सक्षम
रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया:
राजनाथ सिंह ने DRDO और सेना को बधाई देते हुए कहा कि यह भारत की वायु रक्षा को नई ऊँचाई देगा और दुश्मनों के लिए ‘सुदर्शन चक्र’ काल साबित होगा।
नाम क्यों रखा गया ‘सुदर्शन चक्र’?
भारतीय पौराणिक कथाओं में भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र ऐसा शस्त्र माना गया है, जो कभी निशाना नहीं चूकता। इसी प्रतीकात्मक शक्ति के चलते इस सिस्टम को यह नाम दिया गया है।
यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है, जिनके पास अल्ट्रा-मॉडर्न मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम है।
