बिलासपुर में एक बार फिर रेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। कोचिंग डिपो में काम कर रहे एक युवक को ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) तार की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलसना पड़ा। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए परिजन DRM ऑफिस पहुंचे और वहां धरना प्रदर्शन कर रेल प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की।
परिजनों का कहना था कि अगर सुरक्षा के उचित इंतज़ाम किए गए होते तो यह हादसा टल सकता था। उन्होंने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाया और कहा कि बार-बार चेतावनी के बावजूद सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया जाता है। कोचिंग डिपो परिसर में भी परिजनों ने धरना दिया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रखी।
आंदोलनकारियों ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों और आम नागरिकों दोनों की सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन बार-बार होने वाले हादसे यह दर्शाते हैं कि सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित है। परिजनों ने चेतावनी दी कि यदि झुलसे युवक को उचित इलाज और मुआवजा नहीं मिला तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
यह घटना न केवल रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है बल्कि इस बात की ओर भी इशारा करती है कि सुरक्षा के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, पर ज़मीनी हकीकत अलग है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रेलवे प्रबंधन इस हादसे के बाद क्या ठोस कदम उठाता है और क्या वास्तव में भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई गंभीर पहल होती है।
