छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में एक संवेदनशील पहल के तहत सरेंडर किए हुए नक्सलियों ने जेल में बंद अपने परिजनों से मुलाक़ात की। नक्सल प्रकरणों में क़ैद इन बंदियों से मिलने पहुंचे पुनर्वसित माओवादी कैडर्स ने उनसे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
सरेंडर नक्सलियों ने कहा कि अब समय आ गया है कि हथियार त्यागकर समाज में वापस आया जाए, क्योंकि सरकार भी पुनर्वास के अवसर दे रही है। मुलाक़ात के दौरान कई कैडर्स भावुक हो गए और अपने परिवारों को वर्षों बाद देखकर आंसू नहीं रोक पाए।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पहल को शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भटके युवाओं को समाज से जोड़ने और माओवादी विचारधारा से बाहर लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जेल में बंद उन युवाओं को भी पुनर्वास का विकल्प दिया जा रहा है, जो कभी बहकावे में आकर हिंसा से जुड़ गए थे। सरकार चाहती है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति, विश्वास और विकास की लकीर और गहरी हो, ताकि लोग भविष्य को सुरक्षित महसूस करें।
यह पहला अवसर था जब राज्य सरकार ने परिवार मिलन कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें पुनर्वसित माओवादी कैडर्स—संतू वेक्को, मारो वेक्को, रामलाल वेक्को, संतोष कुंजाम, बदरू ओयाम, मासा तामो, लखन ओयाम, लक्ष्मण ताती, मैनू आरकी, राजेश वेड्डी और कुमारी आरकी—ने जेल में बंद अपने परिजनों से मुलाक़ात की।
सालों बाद भाई ने भाई को गले लगाया, भाभी ने सिर पर हाथ फेरा और परिजनों ने अपने बंद रिश्तेदारों को पहचानते ही भावुक होकर रोना शुरू कर दिया। सभी ने अपने प्रियजनों से कहा कि जैसे उनके नेता भी हथियार छोड़ चुके हैं, वैसे ही अब वे भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं।
सरकार का उद्देश्य केवल मुलाक़ात कराना नहीं, बल्कि परिवारों को जोड़कर भावनात्मक पुनर्वास के माध्यम से समाज में समरसता और अपनत्व बढ़ाना है।
