उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को मंगलवार देर रात एक नाटकीय ऑपरेशन में शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया गया। लखनऊ पुलिस की सर्विलांस टीम लगातार उनकी लोकेशन ट्रैक कर रही थी। लोकेशन मिलते ही शाहजहांपुर पुलिस की सहायता लिए बगैर टीम सीधे स्टेशन पहुंची और ट्रेन रुकते ही उनके कोच में चढ़कर उन्हें पकड़ लिया। उस समय ठाकुर नई दिल्ली जाने के लिए लखनऊ से रवाना हुए थे और अपने कोच में गहरी नींद में थे। पुलिस ने उन्हें सीट से उठाया और तत्काल ट्रेन से नीचे उतार लिया।
सूत्रों के अनुसार, अमिताभ ठाकुर के खिलाफ देवरिया में जमीन के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। बताया जाता है कि एक अवधि के दौरान, जब वे देवरिया में एसपी के पद पर कार्यरत थे, उस समय जमीन खरीद के विवादित मामले में उनके खिलाफ शिकायतें हुई थीं। इसी मामले में धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर एसआईटी जांच का गठन किया गया है। पुलिस के अनुसार, मामले से संबंधित साक्ष्य जुटाने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है।
पुलिस टीम रात करीब 1:25 बजे शाहजहांपुर स्टेशन पहुंची और तय समय 1:52 पर जैसे ही ट्रेन रुकी, टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए दो ओर से कोच को घेर लिया। अमिताभ ठाकुर को बर्थ से नीचे उतार लिया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और कर्मचारियों के बीच कुछ देर के लिए हड़कंप की स्थिति बन गई।
उधर, लखनऊ के तालकटोरा थाने में भी ठाकुर के खिलाफ कुछ दिन पहले धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। बुधवार सुबह तालकटोरा थानाध्यक्ष कुलदीप कुमार दुबे ने फोन पर उनकी पत्नी नूतन ठाकुर को गिरफ्तारी की सूचना दी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी गिरफ्तारी की खबर तेज़ी से वायरल हो गई।
पुलिस उपमहानिरीक्षक पश्चिमी रेंज विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि देवरिया के मामले में ठाकुर के खिलाफ पर्याप्त आधार पर कार्रवाई की गई है। जांच टीम ने सभी पहलुओं को देखते हुए गिरफ्तारी का निर्णय लिया। पुलिस का कहना है कि आगे की पूछताछ से कई महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है। इस बीच, एसआईटी लगातार उनसे पूछताछ कर रही है और दोनों जिलों के मामलों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
यह पूरी कार्रवाई न सिर्फ अचानक और नाटकीय थी, बल्कि इसने प्रदेश के पुलिस महकमे में हलचल भी मचा दी है। चलती ट्रेन से आधी रात में गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई अपने आप में बेहद कम देखने को मिलती है, जिसने इस मामले को और भी चर्चित बना दिया है।
