रायपुर: तीसरे बजट सत्र को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियों को तेज कर दिया है। बजट को अधिक व्यावहारिक, संतुलित और विकासोन्मुख बनाने के उद्देश्य से वित्त विभाग ने व्यापक रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी ओपी चौधरी कर रहे हैं, जिनकी टीम अगले चार दिनों तक लगातार मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकों में मंथन करेगी।
इन वन-टू-वन बैठकों में प्रत्येक मंत्री अपने विभाग से जुड़ी योजनाओं, आगामी वर्ष की प्राथमिकताओं, लंबित परियोजनाओं और अतिरिक्त बजटीय मांगों को विस्तार से रखेगा। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि किन योजनाओं को अधिक धन की आवश्यकता है और किन क्षेत्रों में खर्च को तर्कसंगत बनाया जा सकता है। वित्त विभाग इन सुझावों का गहन विश्लेषण कर बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बार बजट में आधारभूत ढांचा, ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर विशेष जोर दिया जा सकता है। साथ ही, राजस्व बढ़ाने और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण के उपायों पर भी गंभीर चर्चा होगी।
बैठकों का उद्देश्य केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि बजट में सरकार की नीतिगत प्राथमिकताएं साफ तौर पर झलकें। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सीधी चर्चा से विभागीय समन्वय बेहतर होगा और बजट सत्र के दौरान सदन में ठोस और स्पष्ट प्रस्ताव रखे जा सकेंगे।
बजट सत्र से पहले इस स्तर की तैयारी को सरकार की गंभीरता के तौर पर देखा जा रहा है, ता कि आने वाले वित्तीय वर्ष में विकास योजनाओं को बिना रुकावट आगे बढ़ाया जा सके और जनता से जुड़े मुद्दों को बजट में पर्याप्त स्थान मिल सके।
