42 C
Raipur
June 5, 2026
The Defence
अन्य

शाह का तीखा तंज: अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द आएगी शर्म, भारतीय भाषाएं ही हमारा गर्व

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए एक जोरदार बयान दिया है, जिसने देश भर में नई बहस छेड़ दी है। एक पुस्तक विमोचन समारोह में शाह ने कहा कि वह दिन अब दूर नहीं जब अंग्रेजी बोलने वालों को शर्मिंदगी महसूस होगी और लोग अपनी मातृभाषा पर गर्व करेंगे। उन्होंने भारतीय भाषाओं को देश की आत्मा और सांस्कृतिक पहचान का आधार बताते हुए कहा, “हमारी भाषाएं हमारी जड़ें हैं। बिना इनके हम भारतीय नहीं हो सकते।” इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है, जहां लोग इसे भारतीय संस्कृति का उत्थान मान रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्या कहा?

शाह ने अपने संबोधन में भारतीय भाषाओं को न केवल सांस्कृतिक धरोहर, बल्कि देश की एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “हमारा इतिहास, हमारी संस्कृति और हमारी भावनाएं विदेशी भाषा में बयान नहीं हो सकतीं। जल्द ही लोग अपनी भाषा बोलने में गर्व महसूस करेंगे और अंग्रेजी बोलने में हिचकेंगे।” शाह ने नई शिक्षा नीति (NEP) का हवाला देते हुए कहा कि सरकार प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को प्राथमिकता दे रही है, जिससे बच्चों को अपनी भाषा में पढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने प्रशासन, न्यायपालिका और तकनीकी क्षेत्रों में हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया।

प्रतिक्रियाएं और विवाद

शाह के बयान ने समाज में भाषाई अस्मिता और वैश्वीकरण के बीच एक नई चर्चा को जन्म दे दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थकों ने इसे सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक बताया, तो विपक्ष ने इसे अंग्रेजी भाषा के खिलाफ अनावश्यक टिप्पणी करार दिया। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “अंग्रेजी वैश्विक संवाद की कुंजी है। इसे शर्म से जोड़ना गलत है।” वहीं, कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शाह के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं को हाशिए पर रखने की मानसिकता को बदलने की जरूरत है।

सोशल मीडिया पर #IndianLanguages और #AmitShah ट्रेंड कर रहे हैं। दिल्ली की एक कॉलेज छात्रा नेहा ने ट्वीट किया, “अंग्रेजी सीखना जरूरी है, लेकिन अपनी भाषा को भूलना नहीं। शाह जी का बयान सही दिशा में है।” वहीं, बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने लिखा, “अंग्रेजी को निशाना बनाना ठीक नहीं। हमें सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।”

सरकार की भाषा नीति

शाह ने अपने भाषण में सरकार के उन प्रयासों का जिक्र किया, जो भारतीय भाषाओं को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके अलावा, तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ाने के लिए संसाधन विकसित किए जा रहे हैं। शाह ने यह भी कहा कि भारतीय भाषाएं रोजगार सृजन और नवाचार का माध्यम बन सकती हैं, अगर उन्हें सही अवसर और तकनीकी सहायता मिले।

Related posts

AAI भर्ती में आखिरी दिन की भीड़: इंजीनियर्स के लिए 976 पद खाली, सैलरी 1.40 लाख तक

admin

सचिन के बेटे अर्जुन तेंदुलकर की सगाई: सानिया चंडोक बनेंगी तेंदुलकर परिवार की बहू

admin

कनाडा में कपिल शर्मा के कैफे पर खालिस्तानी हमला: 9 गोलियां चलाईं, वीडियो वायरल, उद्घाटन के 3 दिन बाद सनसनी

admin

Leave a Comment