September 7, 2026
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“जिंदा मां को मरा बताकर बेटा बना सरकारी अफसर: रीवा में फर्जीवाड़े का खेल, अनुकंपा नियुक्तियों में 10 लाख की दलाली”

मध्यप्रदेश के रीवा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अनुकंपा नियुक्तियों में फर्जीवाड़े का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। यह गिरोह जिंदा लोगों को मृत दिखाकर उनके परिजनों को सरकारी नौकरी दिलवा रहा है। इस घोटाले ने न सिर्फ व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को उजागर किया है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सरकारी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण:

रीवा जिले में अब तक 6 ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां अनुकंपा नियुक्ति के लिए किसी जीवित परिजन, खासकर मां को मृत घोषित कर दिया गया। हाल ही में एक मामला उस समय सामने आया जब एक महिला, जिसे दस्तावेजों में मृत बताया गया था, खुद कलेक्टर कार्यालय पहुंच गई। इस महिला के नाम पर उसके बेटे को 10 लाख रुपये की लेन-देन के बाद नौकरी मिल चुकी थी।

जांच में पता चला कि एक पूरा गिरोह इस तरह की फर्जी नियुक्तियों में शामिल है, जो दस्तावेजों में हेरफेर कर, मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और सेवा पुस्तिकाओं में फर्जीवाड़ा करता है। कुछ मामलों में पंचायत सचिव, जनपद कर्मचारी और विभागीय क्लर्क तक इस गोरखधंधे में लिप्त पाए गए हैं।

सरकारी तंत्र की भूमिका और चूक:

इस घोटाले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा कैसे हो गया और किसी भी स्तर पर जांच या सत्यापन क्यों नहीं हुआ। एक व्यक्ति की मृत्यु का प्रमाण देने के लिए कई सरकारी दस्तावेजों और अफसरों की जरूरत होती है, फिर भी किसी ने संदेह नहीं जताया। इसका मतलब है कि या तो सिस्टम में भारी लापरवाही है या फिर कुछ लोग जानबूझकर इन मामलों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

 

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