छत्तीसगढ़ की मौजूदा सरकार बिजली बिल में दी जा रही राहत को लेकर जनता के बीच वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जब भी इस योजना की जड़ में झांककर देखा जाता है, तो सरकार खुद यह मानती है कि इसकी नींव पिछली कांग्रेस सरकार ने रखी थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है – जब योजना कांग्रेस की है, तो आपकी सरकार क्या नया कर रही है?
यदि हर अच्छे काम का श्रेय पिछली सरकार को देना है और हर गलती पर भी वही दोषी है, तो मौजूदा सरकार की जवाबदेही कहाँ है? क्या यह सरकार सिर्फ कुर्सी पर बैठकर पिछली नीतियों पर अपना नाम चिपकाने और जनता को गुमराह करने के लिए आई है?
जनता ने वर्तमान सरकार को बदलाव की उम्मीद के साथ चुना था। उन्हें लगा था कि नई सरकार नई ऊर्जा और नए विचारों के साथ कुछ अलग और बेहतर करेगी। लेकिन हकीकत यह है कि पुराने कामों पर ठप्पा लगाकर क्रेडिट लेने की होड़ मची है।
इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि सरकार जनता से जुड़े असली मुद्दों से भागती नज़र आ रही है – महंगाई, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य सेवाएं, और किसानों की हालत जैसे मुद्दों पर ठोस काम नहीं हो रहा है। सिर्फ प्रचार हो रहा है, और वह भी पूर्ववर्ती सरकार के कार्यों का।
जनता अब यह सवाल पूछने लगी है कि जब सभी योजनाएं और राहत कांग्रेस की ही देन हैं, तो आपने सरकार क्यों बनाई? क्या सत्ता में आने का मकसद सिर्फ़ पुराने कामों पर अपनी मोहर लगाना और जनता का ‘तेल निकालना’ है?
लोकतंत्र में जनता को जवाब चाहिए, बहाने नहीं। और अगर सरकार जवाब नहीं दे सकती, तो अगली बार जनता जवाब देना भी जानती है।
