छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की अहम बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में संगठन के प्रदेश अध्यक्षों और पदाधिकारियों ने प्रदेशभर के कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों पर गंभीर चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी आंदोलन की रणनीति तय करना था।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 22 अगस्त को प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों पर एक साथ धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस एकदिवसीय आंदोलन के जरिए कर्मचारी और अधिकारी सरकार का ध्यान अपनी प्रमुख मांगों की ओर आकर्षित करेंगे। इसमें सबसे अहम मांग यह है कि शिक्षकों की सेवा गणना को एलबी संवर्ग की प्रथम सेवा से जोड़ा जाए और सभी लाभ अन्य कर्मचारियों की तरह समान रूप से प्रदान किए जाएँ।
फेडरेशन ने साफ किया है कि कर्मचारियों और शिक्षकों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन उन पर अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया। संगठन के नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा समय रहते इन समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। यदि मांगों को अनसुना किया गया, तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।
इस प्रकार रायपुर की बैठक ने न केवल प्रदेशभर के कर्मचारियों को एकजुट किया है बल्कि आने वाले समय में सरकार के समक्ष उनकी एक मजबूत और संगठित आवाज़ पेश करने की तैयारी भी कर दी है। 22 अगस्त का दिन छत्तीसगढ़ के कर्मचारी आंदोलन के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है।
