उत्तर भारत में हो रही लगातार बारिश का असर अब धार्मिक नगरी चित्रकूट पर भी गहराने लगा है। दो दिनों से हो रही मूसलधार बारिश ने क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति मंडाकिनी नदी की है, जिसका जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। नदी का पानी रामघाट, भरतघाट और अन्य प्रमुख स्थानों पर फैल गया है, जिससे पूरे शहर का संपर्क मार्ग अवरुद्ध हो गया है।
मंडाकिनी के उफान ने चित्रकूट की सड़कों को नदी में तब्दील कर दिया है। कई मोहल्लों में घरों में पानी भर गया है, जिससे लोग ऊपरी मंजिलों पर रहने को मजबूर हो गए हैं। बाजार, मंदिर परिसर और घाट सभी जलमग्न हैं। बाढ़ का पानी पुरानी लंका तिराहा और एमपी बॉर्डर के प्रमुख तिराहों तक पहुंच चुका है, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।
स्थिति इतनी विकराल हो गई है कि स्थानीय प्रशासन को नावों की मदद से लोगों को निकालना पड़ रहा है। नाविक पूरे क्षेत्र में घूम-घूमकर फंसे लोगों की मदद कर रहे हैं। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है और राहत-बचाव कार्य जारी हैं। बाढ़ की स्थिति ने 2003 की भयावह बाढ़ की याद ताजा कर दी है, जब चित्रकूट पूरी तरह जलमग्न हो गया था।
